Posts

सुबोध गुप्ता पर लगे यौन छेड़छाड़ के आरोपों पर विदेशी गैलरीज द्वारा दिखाए रवैये ने सुबोध गुप्ता के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है और कला बाजार में अपनी हैसियत को बचा पाना उनके लिए बड़ी चुनौती बना है

Image
मीटू हैशटैग अभियान के चलते यौन उत्पीड़न के आरोपों के घेरे में आने वाले हाई प्रोफाइल ऑर्टिस्ट सुबोध गुप्ता के बाजार को बचाने की कोशिशें तेज हो गई हैं, और इस मामले में पाब्लो पिकासो से जुड़े किस्सों का हवाला देकर मामले को 'हल्का' करने का प्रयास किया जा रहा है ।  एक वरिष्ठ महिला कला समीक्षक व क्यूरेटर ने बेहद 'चालाकी' से लिखे लेख में विस्तार से बताया है कि पिकासो अपनी प्रेमिकाओं के साथ बहुत ही खराब व्यवहार किया करते थे और महिलाओं के प्रति बहुत ही नकारात्मक विचार रखते थे, लेकिन फिर भी उनकी कृतियों के दामों पर कभी भी संकट नहीं आया और वह हमेशा ही लगातार बढ़ते गए हैं । पिकासो के व्यवहार और उनकी बातों के जरिये अप्रत्यक्ष रूप से सुबोध गुप्ता का बचाव करने की कोशिशों के बावजूद वह कला बाजार में सुबोध गुप्ता की हैसियत के बने रहने को लेकर हालाँकि आश्वस्त नहीं हैं, और उन्होंने मामले को 'समय' पर छोड़ दिया है ।   दरअसल वह भी समझ रही हैं कि पिकासो और सुबोध गुप्ता का मामला एक जैसा नहीं है : पिकासो की बदतमीजियों के उदाहरण उन महिलाओं के साथ के हैं, जो उनके साथ संबंधों में रहीं; जबकि...

आईफैक्स की 91वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी में चयनित होने व पुरस्कृत होने में बड़े कला केंद्रों के मुकाबले छोटे शहरों के कलाकारों के काम को मिली तरजीह बदलते कला वातावरण का ही नतीजा है

Image
आईफैक्स (ऑल इंडिया फाईन ऑर्ट्स एंड क्राफ्ट्स सोसायटी) की 91 वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी समकालीन कला परिदृश्य में देश के दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, वडोदरा जैसे बड़े कला केंद्रों के मुकाबले छोटे और कला के क्षेत्र में अनजान से शहरों के कलाकारों की बढ़ती सक्रियता तथा उपलब्धियों का एक दिलचस्प नजारा प्रस्तुत करती है ।  छोटे व कला के क्षेत्र में अनजान से शहरों के कलाकारों ने न सिर्फ वार्षिक कला प्रदर्शनी के लिए चयनित होने के मामले में बड़े कला केंद्रों के कलाकारों को कड़ी टक्कर दी है, बल्कि पुरस्कृत होने के मामले में भी बेहतर 'प्रदर्शन' किया है । आमतौर पर माना/समझा जाता है - और ठीक ही माना/समझा जाता है - कि बड़े कला केंद्रों में चूँकि सुविधाओं और सक्रियताओं का जोर रहता है, इसलिए वहाँ के कलाकार ज्यादा चेतनासंपन्न होते हैं और उनकी अभिव्यक्ति कम से कम सधी हुई तो होती ही है; जबकि सुविधाओं व सक्रियताओं के अभाव में छोटे कला केंद्रों में उदासीन व निराशाजनक स्थिति होने के कारण वहाँ के कलाकारों के लिए अपनी पहचान बना पाना और मुख्य धारा में शामिल हो पाना काफी मुश...

'सेरेण्डिपिटी ऑर्ट फेस्टिबल 2018' का क्यूरेटर बनने और फिर यौन उत्पीड़न के आरोपों के घेरे में आने के कारण हाई प्रोफाइल ऑर्टिस्ट सुबोध गुप्ता खासी फजीहत के शिकार हो रहे हैं

Image
कल से गोवा में शुरू हो रहे 'सेरेण्डिपिटी ऑर्ट फेस्टिबल 2018' के क्यूरेशन की जिम्मेदारी संभालने के चलते हाई प्रोफाइल ऑर्टिस्ट सुबोध गुप्ता जैसे खासी मुसीबत में फँस गए हैं । पहले तो उन पर क्यूरेटर की जिम्मेदारी संभालने के कारण दोहरे मापदंड लगाने का आरोप लगा, और अब वह मीटू हैशटैग के तहत यौन छेड़छाड़ के आरोपों के घेरे में आ गए हैं । उल्लेखनीय है कि सुबोध गुप्ता कलाकारों के क्यूरेटर की भूमिका निभाने का विरोध करते रहे हैं । दरअसल बोस कृष्णामचारी, जितिश कल्लट, सुदर्शन शेट्टी, अनिता दुबे जैसे प्रमुख कलाकारों के क्यूरेटर की भी जिम्मेदारी निभाने के कारण कला जगत में बहस चली कि एक कलाकार को क्या क्यूरेटर की भूमिका निभाना चाहिए ? अधिकतर कलाकारों का मानना/कहना रहा कि किसी भी कला आयोजन के क्यूरेशन के लिए जिस तरह की विविधतापूर्ण खूबियों की जरूरत होती है, वह कलाकारों में प्रायः नहीं होती है; और एक कलाकार के लिए क्यूरेशन जैसे काम के साथ न्याय करने को लेकर संदेह रहता है - इसलिए कलाकारों को क्यूरेशन के पचड़े में नहीं पड़ना चाहिए । सुबोध गुप्ता भी कलाकारों के क्यूरेशन से दूर रहने के पक्ष में वि...

अनुपम रॉय को 'इमर्जिंग ऑर्टिस्ट अवॉर्ड'

Image
ऐसे समय में जबकि चित्रकार,  खासकर युवा चित्रकार राजनीतिक प्रसंगों/मुद्दों को  अपने चित्रों का विषय बनाने से बचते हैं,  33 वर्षीय अनुपम रॉय का वर्ष 2018 के लिए  'इमर्जिंग ऑर्टिस्ट अवॉर्ड' के लिए  चुना जाना उल्लेखनीय और समयानुकूल लगता है ।   अनुपम रॉय को अपने चित्रों में 'सिस्टम की हिंसा और अन्याय' को  प्रमुखता से अभिव्यक्त करने के लिए इस अवॉर्ड के लिए चुना गया है ।  स्विट्जरलैंड की स्विस ऑर्ट्स काउंसिल के सहयोग से प्रत्येक वर्ष  फाउंडेशन फॉर इंडियन कंटेम्पररी ऑर्ट द्वारा  भारत में दृश्य  कला में अध्ययनरत व अभ्यासरत  युवा कलाकारों को कला के प्रति उनके समर्पण व उनकी प्रतिभा को  प्रोत्साहित करने के लिए यह अवॉर्ड दिया जाता है ।  चित्रकार मनीषा पारेख, चित्रकार व शिक्षाशास्त्री राखी पेसवानी,  कला इतिहासकार व क्यूरेटर लतिका गुप्ता तथा  स्विस ऑर्टिस्ट शिराना शहबाजी की चार सदस्यीय ज्यूरी ने  अवॉर्ड के लिए आए करीब 300 आवेदनों/प्रस्तावों में  अनुपम रॉय को अवॉर्ड के लिए चुना ...

कोच्ची-म्युज़िरिस बिएनाले के चौथे संस्करण के लिए अनिता दुबे को क्युरेटर बना कर एक महिला कलाकार पर भरोसा करके कोच्ची-म्युज़िरिस बिएनाले के आयोजकों द्वारा लूटी गई वाहवाही पर हैशटैग मीटू अभियान ने लेकिन पूरी तरह से पानी फेर दिया है

Image
कोच्ची-म्युज़िरिस बिएनाले की तैयारियों को जैसे ग्रहण लग गया है । केरल में आई विनाशकारी बाढ़ से हुए नुकसान को तो बिएनाले की तैयारियों ने किसी तरह झेल लिया था, लेकिन बिएनाले से जुड़े रियाज कोमु, राहुल भट्टाचार्या तथा वॉल्सन कूरमा कोल्लेरी जैसे बड़े नामों के मीटू हैशटैग में फँसने के चलते कोच्ची-म्युज़िरिस बिएनाले खासी मुसीबत में फँस गया है, और इससे उबरने की तमाम कोशिशों के बावजूद बिएनाले की तैयारियाँ सुस्त पड़ गई हैं ।  तैयारियाँ यूँ तो चल रही हैं, लेकिन बिएनाले से जुड़े लोगों का ही कहना है कि उनमें पहले जैसा जोश व उत्साह नहीं है । बिएनाले के लिए वॉलिंटियर्स के चुनाव का काम तो लगभग ठप ही बताया/सुना जा रहा है, क्योंकि वॉलिंटियरिंग के लिए युवा कलाकार आने रुक गए हैं । बिएनाले से जुड़े लोगों का कहना/बताना है कि बिएनाले से जुड़े बड़े और प्रभावी लोगों के यौन उत्पीड़न के आरोपों के घेरे में आने के बाद बिएनाले के बाकी पदाधिकारी मनोवैज्ञानिक व नैतिक दबाव में आ गए हैं, जिसके चलते बिएनाले की तैयारियों पर खासा प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है ।  उल्लेखनीय है कि मीटू हैशटैग की चपेट में आए...

नज़र ऑर्ट गैलरी बंद हुई !

Image
एक आयोजन के सिलसिले में बडोदरा की प्रमुख ऑर्ट गैलरी  नज़र  से संपर्क करने की कोशिश की तो पता चला कि  अभी हाल ही में उसे बंद कर दिया गया है;   बताया गया कि हम यदि कुछ दिन पहले संपर्क करते तो गैलरी कुछ दिन और खुली रह जाती ।  यह जानकार गहरा धक्का लगा ।  यूँ तो कई ऑर्ट गैलरीज को बंद होते हुए देखा है,  लेकिन बडोदरा की नज़र ऑर्ट गैलरी के बंद होने की सूचना ने बड़ा नुकसान होने जैसा अहसास कराया ।  बडोदरा में हालाँकि बहुत से ऑर्ट सेंटर हैं,  जहाँ स्थानीय कला गतिविधियों के साथ-साथ देश-विदेश की समकालीन  कला  और उसके रुझानों से परिचित होने का मौका मिल जाता है -  लेकिन नज़र ऑर्ट गैलरी आसान पहुँच और व्यापक सक्रियता के कारण  बाहर से बडोदरा जाने/पहुँचने वाले  मेरे जैसे लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र थी ।   देश के आधुनिक मूर्तिशिल्पियों में एक अलग स्थान रखने वाले  नागजी पटेल ने इसकी स्थापना की थी ।  बडोदरा के ही एक गाँव में जन्मे और बडोदरा के  एमएस विश्वविद्यालय से मूर्तिशिल्प की डि...

ऑर्ट गैलरीज के पुराने ढर्रे पर ही कायम रहने के कारण उनके द्वारा आयोजित 'देहली कंटेम्पररी ऑर्ट वीक' एक आम समूह प्रदर्शनी जैसा आयोजन बन कर ही रह गया, और अपने उद्देश्य को प्राप्त कर पाने में नितांत असफल रहा है

Image
'देहली कंटेम्पररी ऑर्ट वीक' शीर्षक से 27 से 30 अगस्त के बीच इंडिया हैबिटेट सेंटर की विजुअल ऑर्ट्स गैलरी में हुआ आयोजन आयोजक ऑर्ट गैलरीज के लिए ढाक के तीन पात ही साबित हुआ है । इस आयोजन को दिल्ली की सात बड़ी ऑर्ट गैलरीज की तरफ से ऑर्ट के नए खरीदारों को खोजने और उन्हें ऑर्ट का ग्राहक बनाने की कोशिश और तैयारी के रूप में देखा/पहचाना गया; लेकिन खुद आयोजक गैलरीज के लोगों का ही मानना और कहना है कि अपना लक्ष्य पाने में इस महत्त्वाकांक्षी आयोजन से कोई खास उत्साहजनक नतीजे नहीं मिले हैं । ऑर्ट वीक का उद्देश्य लोगों को ऑर्ट के प्रति शिक्षित और जागरूक बनाने/करने तथा युवा कलाकारों व उनके काम को प्रमोट करना बताया गया था । लेकिन इन मामलों में भी कुछ होता हुआ दिखा नहीं । कुछ होता हुआ दिखना तो दूर की बात, चार दिनों के इस आयोजन में कुछ किया जाता हुआ भी नहीं नजर आया । लगता है कि आयोजक गैलरीज के कर्ता-धर्ताओं ने यह मान लिया था कि आयोजन के नाम पर कुछ युवा कलाकारों के काम प्रदर्शित कर देने भर से 'लोग' ऑर्ट के प्रति शिक्षित व जागरूक भी हो जायेंगे, और युवा कलाकार और...