कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते पैदा हुई समस्याओं और उनसे निपटने की कोशिशों ने गैलरीज प्रबंधकों व कला क्षेत्र के अन्य कारोबारियों को अच्छे नतीजे तो दिए हैं, लेकिन उससे कला बाजार की डायनामिक्स बदलने के संकेत भी मिल रहे हैं

कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते बने हालात कला जगत को झटका देने वाले तथा उभरते कलाकारों के भविष्य को असुरक्षित करने व असमंजस में डालने वाले भले दिख रहे हों, लेकिन व्यावसायिक ऑर्ट गैलरीज तथा कला के अन्य कारोबारियों के लिए कोई बहुत बुरे साबित नहीं रहे हैं । ऑर्ट गैलरीज तथा कला संस्थाओं को झटके जरूर लगे हैं, और उन्हें अपने महत्त्वाकांक्षी व प्रमुख आयोजनों को रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा है, लेकिन लॉकडाउन के दौरान भी बड़ी व्यावसायिक भारतीय ऑर्ट गैलरीज ने कलाकृतियों की ठीकठाक बिक्री की है । डीएजी गैलरी, जो पहले देहली ऑर्ट गैलरी के नाम से जानी/पहचानी जाती थी, द्वारा लॉकडाउन के दौरान 50 से अधिक कलाकृतियाँ बेचे जाने की सूचना है । लेटीट्यूड 28 गैलरी की प्रिंट्स की ऑनलाइन प्रदर्शनी में भी कई काम बिकने की चर्चा है । वर्चुअल स्पेस में अभी चल रही समूह प्रदर्शनी में एक्सपेरीमेंटर गैलरी के चार काम बिकने की जानकारी है । खास बात यह है कि लॉकडाउन के दौरान बिकी पेंटिंग्स और प्रिंट्स के दाम भी ठीकठाक ही मिले हैं । इसी से, गैलरीज के प्रबंधकों और कला कारोबारियों को विश्वास हो चला है कि कोरोना वायरस के कारण पैदा हुए संकट के कारण कलाकृतियों की कीमतों में कोई बड़ी गिरावट या कमी नहीं आएगी । 
कला के सेकेंडरी मार्केट में मिले नतीजों ने भी गैलरीज  प्रबंधकों तथा कारोबारियों को बिक्री व कीमतों को लेकर आश्वस्त किया है । उल्लेखनीय है कि सेकेंडरी मार्केट की बड़ी खिलाड़ी, अंतर्राष्ट्रीय ऑक्शन फर्म सॉदबी ने लॉकडाउन के दौरान कलाकृतियों के कई सफल ऑक्शन किए हैं । फर्म की तरफ से बताया गया है कि लॉकडाउन के दौरान उन्होंने अभी तक 37 ऑक्शन किए हैं, जिनमें करीब 7 करोड़ अमेरिकी डॉलर की कलाकृतियाँ बिकीं । फर्म के अनुसार, खास बात यह भी रही कि इन ऑक्शन्स में ऐसे खरीदारों की संख्या भी अच्छी खासी रही जो पहली बार कलाकृतियाँ खरीद रहे थे । फर्म ने ऐसे नए खरीदारों की संख्या करीब एक-तिहाई बताई है । इससे उत्साहित होकर फर्म के कर्ताधर्ताओं ने अगले महीनों के लिए ऊँचे लक्ष्य निर्धारित किए हैं और उन्हें प्राप्त करने के लिए खास योजनाएँ बनाई हैं । इससे लगता है कि मौजूदा विश्वव्यापी संकटपूर्ण समय में कला संग्राहकों, खरीदारों और शुभचिंतकों की दिलचस्पी व सक्रियता तो बरकरार है; हालाँकि कला बाजार के उतार-चढ़ाव पर नजर रखने वालों का मानना और कहना है कि मौजूदा संकट के चलते बने हालात कला बाजार की डायनामिक्स को तो अवश्य ही बदल देंगे । दरअसल लॉकडाउन के कारण पैदा हुई समस्याओं और उनसे निपटने की कोशिशों ने गैलरीज प्रबंधकों व कला क्षेत्र के अन्य कारोबारियों को जिन नए तौर-तरीकों से परिचित करवाया है, उससे कला बाजार की दशा और दिशा में गुणात्मक बदलाव तो होगा ही ।  
उल्लेखनीय है कि मौजूदा संकट के दस्तक देते ही व्यावसायिक ऑर्ट गैलरीज ने स्थिति की गंभीरता को पहचाना/समझा और तुरंत स्थिति से निपटने की तैयारी शुरू कर दी । 24 अप्रैल को भारत और दुबई की 10 ऑर्ट गैलरीज ने मिलकर 'इन टच' शीर्षक से एक ऑनलाइन समूह प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, जो 24 जुलाई तक चलेगी । इस प्रदर्शनी में प्रत्येक ऑर्ट गैलरी की तरफ से 12-12 काम प्रदर्शित हैं, जिनमें पेंटिंग्स, स्कल्प्चर और फोटोग्राफ्स हैं । इस समूह प्रदर्शनी की तैयारी से जुड़े गैलरी प्रबंधकों को कहना है कि देशव्यापी लॉकडाउन के लागू होते ही उन्होंने इस बात की जरूरत समझी कि उन्हें जल्दी ही कोई ऐसा उपाय करना होगा, जिसके जरिये वह अपने कलाकारों, संग्राहकों, खरीदारों और शुभचिंतकों को व्यस्त और बाँधे रख सकें । हर कोई इस बात को लेकर भी सशंकित था कि गैलरीज में प्रदर्शनियाँ आयोजित होने का समय पता नहीं कब आयेगा । यह आशंका भी थी ही कि लॉकडाउन हटने के बाद गैलरीज खुल भले ही जायेंगी, लेकिन तब भी लोग उनमें जल्दी नहीं लौटेंगे/जुटेंगे । लॉकडाउन लागू होने के बाद, हर किसी की दौड़ डिजिटल स्पेस की तरफ शुरू तो हुई और सोशल मीडिया के मंच पर प्रदशनों और प्रस्तुतियों की भीड़ जमा होने लगी, लेकिन कला क्षेत्र के खिलाड़ियों के लिए वर्चुअल स्पेस पर काम करना खासा चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि कला क्षेत्र का कारोबार मेल-मुलाकातों और व्यक्तिगत संबंधों पर आधारित रहा है । कला क्षेत्र के जो कारोबारी ऑनलाइन मॉडल पर ही निर्भर रहे हैं, वह भी निजी मुलाकातों और ड्रिंक्स-पार्टियों के आयोजनों से नहीं बच सके हैं । इस सच्चाई को अच्छे से रेखांकित किया गया है कि कला बाजार में जिस तरह के संबंध बनाने होते हैं, वह जूम कॉल पर नहीं बन सकते हैं । कला बाजार पारंपरिक रूप से वॉक-इन कस्टमर (आकस्मिक ग्राहक) पर निर्भर रहा है । देखा/पाया गया है कि एक सक्रिय वेबसाइट का गैलरीज और कलाकारों को बहुत फायदा नहीं हुआ है । ऐसे में,ऑर्ट गैलरीज के सामने समस्या और चुनौती यही रही कि वर्चुअल स्पेस में वह ऑर्ट-गैलरी का एम्बियंस कैसे संभव करें, ताकि देखने वाला काफी हद तक ऐसा महसूस करे, जैसे कि वह गैलरी में ऑर्ट-वर्क देख रहा है । कुछेक ऑर्ट गैलरीज ने एनीमेटेड थ्री-डी का अहसास कराने की कोशिश में स्टेट-ऑफ-द-ऑर्ट तकनीकी को अपनाने पर ध्यान दिया और उन्हें उसके अच्छे नतीजे मिले ।

Comments

  1. I had great expectation from the ' in touch' show that it would project works of art of different Galleries as if one is seeing a group show, but there was no brake through of technology and it was a just show as normally seen on the site. In fact it was an opportunity for them to come up with some thing unusual. Of-course these galleries have their own artists and their own costumers for which this was a lollipop to keep them in their own hold.

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

विवान सुंदरम को समकालीन भारतीय कला की हत्या का जिम्मेदार ठहरा कर जॉनी एमएल समकालीन भारतीय कला के दूसरे प्रमुख कलाकारों को भी अपमानित करने का काम नहीं कर रहे हैं क्या ?

प्रख्यात चित्रकार गोपी गजवानी की फिल्मों में अभिव्यक्त 'स्थितियाँ' हमारे 'देखने' को बहु-आयाम में देखना बनाती हैं

कला बाजार में जोरदार सफलता पाने वाले जितिश कल्लट तथा उनके जैसे कामयाब कलाकारों की कलाप्रेमियों के बीच वैसी पहचान और प्रतिष्ठा आखिर नहीं बन पाई है, जैसी पहचान व प्रतिष्ठा उनके पूर्ववर्ती कलाकारों को मिली है