इंडिया ऑर्ट फेयर में इटालियन दूतावास सांस्कृतिक केंद्र के बूथ पर कलाकारों के साथ बदतमीजी करते हुए बूथ की गतिविधियों को रोक देने और उसे बंद करवा देने की मनमानी कार्रवाई करके फेयर की डायरेक्टर जगदीप जगपाल ने वास्तव में अपने कला और कलाकार विरोधी रवैये को ही प्रदर्शित किया है

इंडिया ऑर्ट फेयर के समापन से कुछ पहले इटालियन दूतावास सांस्कृतिक केंद्र के बूथ पर जो हुआ, वह इंडिया ऑर्ट फेयर के पदाधिकारियों तथा डायरेक्टर जगदीप जगपाल की साख को धूल में मिला देने के लिए काफी है । इस घटना ने दिखाया/बताया है कि कला को लेकर बड़ी बड़ी बातें करने वाले आयोजकों के लिए न तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का कोई मतलब है, और न उनकी सोच व उनके व्यवहार में कलाकारों के प्रति कोई सम्मान है । उल्लेखनीय है कि इटालियन दूतावास सांस्कृतिक केंद्र के बूथ पर पहले ही दिन से लाइव कार्यक्रम चल रहे थे, जिनमें भारतीय महिलाओं के संघर्षों व उनकी जिजीविषा को सौंदर्य, प्रेम, स्नेह, करुणा जैसे रूपों में अभिव्यक्त करने वाली कविताएँ पढ़ीं जा रही थीं; और एक कम्युनिटी प्रोजेक्ट के तहत आम महिलाओं द्वारा बनाये गए चित्रों को प्रदर्शित किया जा रहा था । मैना मुखर्जी ने इस आयोजन को क्यूरेट किया था । बूथ पर कई बार बताया गया था कि यह आयोजन भारतीय महिलाओं से संबद्ध है, और इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय महिलाओं के लचीलेपन व दृढ़ता के साथ एकता व समन्वय प्रकट करना है । चारों दिन इस बूथ पर होने वाले कार्यक्रमों में लोगों ने खासी दिलचस्पी दिखाई और क्यूरेटर व उनके साथी कलाकार लोगों से मिल रही प्रतिक्रिया से खुश व उत्साहित थे । चौथे और अंतिम दिन कल जब फेयर समापन की तरफ बढ़ रहा था, तब इस बूथ पर अचानक पुलिस आ पहुँची । 
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यहाँ पेंटिंग्स के जरिये नागरिकता संशोधन कानून की खिलाफत किए जाने की शिकायत मिली है, इसलिए यहाँ की गतिविधियों को तुरंत रोका जाए । क्यूरेटर मैना मुखर्जी ने पुलिस अधिकारियों से तर्क किया कि यहाँ प्रदर्शित पेंटिंग्स सामने हैं, आप देखिये और बताइये कि किस पेंटिंग में नागरिकता संशोधन कानून की खिलाफत की गई है । पुलिस अधिकारियों ने पेंटिंग्स पर नजर डाली, लेकिन उन्हें आपत्तिजनक कुछ नहीं दिखा, और वह तुरंत ही वहाँ से चले गए । चले तो गए, लेकिन फिर जल्दी ही वापस लौट आए - और इस बार उनके साथ इंडिया ऑर्ट फेयर के पदाधिकारी भी थे । मामले में शर्मनाक सीन इसके बाद बना । मौके पर मौजूद कलाकार गार्गी चंदोला ने बताया कि फेयर के पदाधिकारियों ने पुलिस से भी ज्यादा पुलिसियापन दिखाते हुए कार्यक्रम रोक देने, पेंटिंग्स को उतार/हटा लेने तथा बूथ को बंद कर देने का फरमान सुना दिया । वह बूथ पर मौजूद कलाकारों की कोई बात सुनने को तैयार ही नहीं हुए । वह लगातार कलाकारों को यह कहते हुए हड़काते रहे कि उन्हें जब स्पष्ट निर्देश थे कि बूथ पर होने वाली प्रत्येक गतिविधि से उन्हें फेयर आयोजकों को अवगत कराना है, तो उन्होंने निर्देश का पालन क्यों नहीं किया । उन्हें बताया गया कि फेयर आयोजकों को बूथ पर होने वाली प्रत्येक गतिविधि से अवगत कराया गया है, और फिर यहाँ ऐसी कौन से गतिविधि हो रही  जिसे आपत्तिजनक कहा/माना जा सकता है । लेकिन इंडिया ऑर्ट फेयर के पदाधिकारियों ने उनकी एक न सुनी और बूथ बंद करने/करवाने पर अड़े रहे ।
अब पुलिस अधिकारियों ने भी मामले में ज्यादा दिलचस्पी लेना शुरू किया । गार्गी चंदोला के अनुसार, उन्होंने पूछा कि यहाँ कुछ हो रहा है, उसके पीछे उद्देश्य क्या है । उर्दू में लिखे एक पोस्टर को उन्होंने हिंदी में पढ़ने के लिए कहा, जिसमें लिखा था - 'तू शाहीन है परवाज़ है काम तेरे / तेरे सामने आसमान और भी है ।' पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उन्हें शिकायत मिली है कि यहाँ प्रदर्शित पेंटिंग्स शाहीन बाग़ में धरने पर बैठीं महिलाओं जैसे कपड़े पहनी महिलाओं ने बनाईं हैं । गार्गी ने बताया कि यह सुनकर वह और उनके साथी स्तब्ध रह गए । हालाँकि कुल नतीजा यह रहा कि पुलिस अधिकारियों को आपत्तिजनक कुछ नहीं मिला/लगा और वह अपनी तरफ से मामले को बंद करके अब की बार सचमुच वापस लौट गए । पीटीआई की खबर में बताया गया है कि दिल्ली पुलिस के एक बड़े पदाधिकारी ने स्वीकार किया कि पुलिस ने प्राप्त शिकायत के आधार पर मौके की जाँच की और उन्हें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला । पुलिस ने तो मान लिया कि इटालियन दूतावास सांस्कृतिक केंद्र के बूथ पर उन्हें ऐसा कुछ नहीं मिला, जिसके आधार पर वह कोई कार्रवाई करें - लेकिन इंडिया ऑर्ट फेयर के पदाधिकारियों ने मामले को समझे बिना और कलाकारों के साथ बदतमीजी करते हुए बूथ की गतिविधियों को रोक दिया और बंद करवा दिया । कोढ़ में खाज वाली बात यह हुई कि फेयर की डायरेक्टर जगदीप जगपाल ने बाद में बात का बतंगड़ बनाते हुए दिल्ली स्थित इटालियन राजदूत को फोन करके शिकायत की कि इटालियन दूतावास सांस्कृतिक केंद्र के बूथ पर पता नहीं ऐसा क्या हो रहा था कि पुलिस आ गई और बूथ बंद करवाना पड़ा । 
इंडिया ऑर्ट फेयर के बूथों पर क्या हो रहा है, यह फेयर के आयोजकों को पता होना चाहिए - यह उनका काम है, उनकी जिम्मेदारी है; अपनी जिम्मेदारी को ठीक से निभाने की बजाये एक बेसिरपैर की शिकायत पर हुई पुलिस की कार्रवाई से बौखला कर बिना सच्चाई जाने कलाकारों को बेइज्जत करने तथा बूथ बंद करवा देने का काम करके इंडिया ऑर्ट फेयर के पदाधिकारियों ने वास्तव में अपने कला और कलाकार विरोधी सोच व रवैये को ही प्रदर्शित किया है । इस रवैये ने इंडिया ऑर्ट फेयर की डायरेक्टर जगदीप जगपाल की साख को खासी बुरी चोट पहुँचाई है और दिखाया/बताया है कि उनके लिए न तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का कोई मतलब है, और न उनकी सोच व उनके व्यवहार में कलाकारों के प्रति कोई सम्मान है ।                   

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